चैत्र-वैशाख(मार्च-अप्रेल) जब आते हैं नववर्ष के रूप में वसंत ऋतु
को लाते हैं,
चहूँ ओर फैलाकर उजियारा सूरज की किरणें
करती नववर्ष का स्वागत प्याराl
ज्येष्ठ-आषाढ़(मई- जून) मास जब आते हैं, ग्रीष्म ऋतु को लाते
हैं,
इन महीनों में सूरज चमके, धरती दहके,
रोम-रोम पानी को तरसेl
श्रावण- भाद्रपद(सावन-भादो)(जुलाई-अगस्त) ये
दो महीने खुल के सावन बरसे,
तपती
धरती झूम के हर्षे, बरखा जो बरसे, फसलें सोना उगले, फिजायें साँस
ले भरकेl
अश्विना-अश्वयुज-कृतिका(सितम्बर- अक्टूबर
और आधा नवंबर) जो आये साथ में थोड़ा दिन छोटा
कर जाए,
पतझड़ की हवा जो आई शाखों ने
ली अंगड़ाई, टूटे पत्ते फिजाओं में फैले, बोले लो अब हम तो चलेl
मार्गशीर्ष-पौष (नवंबर-दिसम्बर) का महिना हेमंत ऋतु का
होता है, थोड़ी सिहरन देने लगता है,
सुरमई शामें जल्दी ढलने
लगती हैं, रातें ठंडी होने लगती है, मौसम करवट लेने लगता हैl
माघ- फाल्गुन(जनवरी-फरवरी) का महिना शीत ऋतु कहलाता है, जो तीखी
ठंड लाता है,
छोटे होते
दिनों में सूरज बादलों में छुपने लगता हैl तीखी ठंडी हवाएं हाड़ कपकपाने लगती हैl
@
मेखला
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