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लो मैंने अपने पंख खोल लिए

 

 

 

लो मैंने अपने पंख खोल लिए

नए आसमान को छूने चली हूँ

पीछे कुछ छोड़कर नहीं,

अनुभवों का पिटारा साथ लेकर चली हूँ

लो मैं उड़ने चली हूँ,

एक नये सफर पर चली हूँ

मंजिल के कुछ और करीब हुई हूँ,

सबसे सीखा है बहुत कुछ,

थोड़ी सी मैं और सधी हूँ

लो मैंने अपने पंख खोल लिए

नए आसमान को छूने चली हूँ

 

ज्ञान चक्षु मेरे थे मुंदे हुए,

थोड़ी-थोड़ी आँखे खोल रही हूँ

बहुत कुछ सीखा, बहुत कुछ जाना,  

कुछ और पाने के लिए मैं आगे बड़ी हूँ

@मेखला

 

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