नववर्ष
की शुभकामनाएं इन दिनों आपको कई बार कहने और सुनने को मिलेगी, लेकिन नववर्ष के आयोजन के रूप में
१ जनवरी
का दिन आधुनिक देशों में हमेशा से नहीं था। कैसे हुई १ जनवरी को नए साल के रूप में
मनाने की शुरुआत।
नववर्ष
के आयोजन का प्रमाण प्रथम बार लगभग ४०० वर्ष पूर्व प्राचीन बेबीलोन में मिला था। सन्ï २००० बीसी के करीब बेबीलोन निवासी नववर्ष की शुरुआत अब के २३
मार्च को मनाते थे जबकि उनके पास कलेंडर नहीं था। बेबीलोन निवासी यह आयोजन पूरे ११
दिन तक मनाते थे । प्रत्येक दिन का कोई न कोई अलग ढग़ होता था। मार्च नववर्ष की शुरुआत का सही समय है क्योंकि यह समय वसन्त और
नयी फसल बोने का होता है। जनवरी का न तो कोई ज्योतिषीय महत्त्व है और न ही कृषि की
दृष्टिï से। यह तो पूर्ण रूप से स्वेच्छा
से निश्चित किया गया है।
रोम वासियों
ने नववर्ष को २५ मार्च से मनाना शुरू किया ,लेकिन
उनके कैलेन्डर में वहां के सम्राटों द्वारा लगातार परिवर्तन होता रहा।जिससे नववर्ष
आरम्भ होने की तिथि भी बदलती रही। फिर उन्होंने महसूस किया कि ऐसा कलेण्डर तैयार किया
जाए जो सूर्य की गति के अनुसार व्यवस्थित हो सके।
१५३ बीसी
में रोमन सीनेट ने कलेंडर को ठीक करने के लिए नये वर्ष का आरम्भ १ जनवरी से मनाने की
घोषणा की। इसको स्थायित्व जूलियस सीजर ने दिया और ४६ बीसी में यह जूलियन कलेंडर के
नाम से स्थाई हो गया और जूलियन कलेंडर के नाम से जाने लगा। इसके पुन: एक जनवरी से मनाया
जाने लगा लेकिन कलेंडर को सूर्य की गति के अनुसार करने के लिए सीजर को बीते हुए वर्ष
को ४४५ दिन पीछे करना पड़ा।
ऑल्ड
लैंग सेन या बहुत समय पहले
विश्व
के अधिकांश अंग्रेजीभाषी देशों में ऑल्ड लैंग सेन गाना नए साल की मध्यरात्रि को बजाया
जाता है। १७०० में राबर्ट बर्नस ने इस गाने को रचा जो १७९६ में उनकी मृत्योपरांत प्रकाशित
हुआ। अब भी यह गीत थोड़े बहुत परिवर्तनों के साथ बज रहा है। पुरानी स्कॉच धुन पर गाए
जाने वाले इस गीत के शीर्षक का भावार्थ है ‘बहुत समय पहले अथवा पुराने अच्छे दिन।’
नए साल
की परम्पराएं
सामान्यत:
यह सोचा जाता है कि नए साल की शुरुआत अगर अच्छी हो तो पूरा साल अच्छा जाता है और नए
साल की शुरुआत पर भाग्य निर्भर रहता है। साल के आंरम्भ में वे क्या करते हैं और क्या
खाते है, उस पर भी सौभाग्य निर्भर करता
है।
नए साल
का स्वागत मनोरंजन से
कुछ संस्कृतियों
में नए साल को परिवारजनों और मित्रों के साथ खाते पीते मनोरंजन के साथ मनाने की परम्परा
निकली जो अभी तक चल रही है। कुछ का विश्वास है कि नए साल पर सबसे पहला अतिथि भी भाग्य
पर प्रभाव डालता है जैसे अगर साल की शुरुआत में आने वाला पहला अतिथि लम्बा और काले
बालों वाला हुआ तो वह शुभ होता है।
नए साल
पर कुछ सम्प्रदायों में अपनी बुरी प्रवृतियों को त्यागने का निर्णय लिया जाता है जैसे
बैबीलोन निवासी नए साल की पूर्व संध्या पर अपना वजन घटाने और ध्रूमपान छोडऩे का प्रण
करते है तो कुछ उधार न लेने का।
नए साल
का स्वागत खान-पान से
कुछ लोगों
को विश्वास है कि खाने की चीजों में भाग्य के बंधे होने की संभावना रहती है अर्थात्ï खाने में शामिल चीजों की आकृति
को भी भाग्य का सूचक मानते है और उसी के अनुरूप खाना खाते है जैसे डच लोग रिंग शेप की चीजों को उस दिन विशेष रूप से खाते
है क्यों कि उनकी मान्यता है कि अगर वे गोल चीजे खाएगें तो जैसे उसका खाद्य सामग्री
का पूरा चक्र बना है उसी तरह उनका भी पूरा साल अच्छी तरह से बीतेगा।
१८८६
में गुलाब के फूलों का उत्सव मनाना शुरू किया गया । उसी साल बैली हन्ट के सदस्यों ने
अपनी-अपनी टोकरियों को सुन्दर फूलों से भरकर
सजाने लगे, जो कि कैलिफोर्निया में सतंरे
की फसल पकने के प्रतीक के रूप में जानी जाने
लगी । १९०२ में पहली बार रोज बॉल फुटबाल खेल को
गुलाब उत्सव में शामिल किया गया। जिसको १९१६ में रोमन में होने वाली रथों की
दौड़ की जगह खेला जाने लगा।
६०० बीसी
के लगभग ग्रीस में यह परम्परा थी अगर नए साल का आरम्भ एक नवजात शिशु के साथ हो तो वह
साल अच्छा निकलता है। उनकी मान्यता के अनुसार एक बच्चा जो डलिया में बैठा है आसमान
से उतरकर आया है। अभी तक इजिप्टियन भगवान के प्रतीक रूप में शिशु को पूजते हैं।
हालांकि
मूर्तिपूजा करने वाले ईसाई लोगों ने इसकी काफी भत्र्सना की, लेकिन बच्चे को प्रतीक रूप में मानने वाले लोगों का बहुमत था
इसलिए उसको मान्यता मिल गई और चर्च में भी जीसस के प्रतीक रूप में बच्चे को स्थान मिल
गया। नए साल पर बच्चे को प्रतीक रूप में पूजना सबसे पहले १४ वीं शताब्दी में जर्मन
लोगों ने अमरीका में शुरू किया।
-प्रस्तुति: मेखला
0 Comments