ईश पूजा और स्वास्थ
ईश पूजा और स्वास्थ्य
ये कैसा संगम है पर जी हां,
वैज्ञानिकों ने भी इस तथ्य की पुश्टि कर दी है, कि हमारे स्वास्थ्य पर ईश वन्दना
का बहुत सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हमारे यहां हर कार्य के पहले भगवान का स्मरण किया
जाता है। दिन की शुरुआत भी ईश वन्दना से ही होती
है। पूजा का हमारी आस्था से संबंध है। वैज्ञानिक बताते है कि पूजा के लिए जरूरी होता
है नित्यकर्मों से निवृत होकर साफ-स्वच्छ होकर पूजा में आना और जब हम यह सब करते है
तो हमारा शरीर स्वास्थ्य के नियमों का पालन कर रहा होता हैं।
1. सुबह-सुबह उठना अपने आप में स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। उस पर उठकर नहा-धो
कर मंदिर जाना इससे शरीर को पर्याप्त आॅक्सीजन मिल जाती है। और तन प्राणवायु से तरोताजा
हो जाता है।
2. मंदिर की घंटियां और आरती हमारे ध्यान को केन्द्रित करती है, जिससे नर्वस सिस्टम प्रभावित होता है।
3. ये सर्तकता हमारी सोच को सकारात्मक दिषा मंे आगे बढ़ाती है।
4. आरती के समय मन षांत होता है, एक जगह होता है इसलिए बुरे विचार नहीं आ पाते और इसलिए उनकी जगह षुद्ध और अच्छे विचार ही मन में
जगह लेते हैं।
5. पूजा से रक्त संचार पर भी प्रभाव पड़ता है । जब मंदिर में सम्मिलित आरती
और भजन गाए जाते हैं तो षुद्ध वायु रक्त संचार बढ़ाती है।
6. पूजा का समय तय होता है सुबह और षाम। जिससे नियत समय पर काम करने की आदत
बनती है।
इस तरह पूजा आपको भगवान से ही नहीं जोड़ती बल्कि आपके
स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती है।
-मेखला
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