दिन में सपने देखिए,बुनिए,सजाइए और स्वयं
को तरोताजा कीजिए। अगर दिन में सपने देखने वाले को आप बीमार समझते हैं और उसको इस
बीमारी से छुटकारा दिलाना चाहते हैं। जी नहीं उन्हें तो करने दीजिए और आप भी करके
देखिए कितना आराम मिलता है। दिन में सपने
देखना या यूं कहें कि कल्पनाचित्र बनाते
रहना। लोगों को यह बीमारी लग सकती है लेकिन खोज द्वारा यह निष्कर्ष निकाला गया है
कि यह बीमारी नहीं बल्कि इलाज है वो भी आज की सबसे बड़ी और तेजी से फैलने वाली
बीमारी तनाव का।
आई टी तकनीक ने जिंदगी को इतना मशीनी बना दिया
है की लोग अपनी दैनिक जरूरतों को भूलते जा रहे हैं। बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा ने
मानसिक तनाव और कुंठा को जन्म दिया जो इंसान को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। इन
सबसे बचने के लिए जरूरी है स्वस्थ कल्पना जो चीज आप जिदंगी में चाहते हैं उसकी
कल्पना कीजिए उसे महसूस कीजिए और उसे देखने की कोशिश कीजिए।
तनाव से राहत दिलाने वाली कारगर तकनीक है जिससे
आप तनाव से जल्दी और अच्छे तरीके से राहत पा सकते हैं।
दृश्यमान करना या कल्पना में कोई चित्र साकार
करना ऐसी तकनीक है जिससे आप जीवन में जो चाहते उसका चित्रण करते हैं। यह इस
सिद्धान्त पर काम करता है कि आपका दिमाग और शरीर आन्तरिक रूप से जुड़े हुए हैं। और
इसीलिए आप कल्पना द्वारा तनाव से पीछा छुड़ा सकते है।
एक छोटा सा व्यायाम आपकी जीवन सरल बना देगा। इस
व्यायाम में आप आराम की अवस्था में बैठकर आंखें बन्द करें और कल्पना करें एक
गरमागरम बड़ा पिज्ज़ा आपके सामने रखा है। देखिए आपकी नाक में पिघली चीज की खुशबू
आने लगी और आपके मुंह में पानी आने लगा। इसे एक मिनट तक करिए।
देखिए कैसे आपका दिमाग शरीर से जुड़ गया। बस
कल्पना की और आपके सामने कोई भी स्वादिष्टï पदार्थ
आ गया। मुंह में पानी आ गया और आप अन्य दुविधाओं से बाहर आ गए। हर शख्स को
कल्पनाशील होना चाहिए। थोड़ा बहुत अचेतनता में भी। दिन में सपने,यादें और खुद से ही बातें करना ये सभी कल्पना को दृश्यमान करने के
तत्व हैं।
काल्पनिक चित्रण करने की तकनीक से आप कई तरह के
तनावों को दूर कर सकते हैं और शारीरिक बीमारी,सिरदर्द,मस्लस स्पम, क्रोनिक पेन और
कई बार तो पारिस्थितिजन्य व्यग्रता से भी मुक्ति दिलाता है।
जल्द राहत के लिए अगर आपके दर्द है तो आप सुकून
देने वाली कल्पना करने की कोशिश कीजिए अधिकतर यह काम करेगी।
जागृत अवस्था में कल्पना करने में थोड़ा समय लग
सकता है। शुरु में आप महसूस करेंगें की जितना आप आकृतियां बनाने की कोशिश करते हैं
वह उतनी ही धुंधली और अस्पष्टï होती जाती हैं।
इससे निरूत्साहित होने की जरूरत नहीं। आपको लगेगा की आप जो छवि बनाते हैं, वो कभी बनती है और कभी बिगड़ती है। कई बार तो अन्य आकृतियां आकर आपकी
कल्पना में खलल डालती हैं। लेकिन इनसे घबराने की जरूरत नहीं यह सब जरा सी कोशिश से
सही हो जाएगा। याद रखिए कोशिश करने से ही परफेक्शन आता है। इसलिए कोशिश करते रहिए
और कल्पना में चित्र बनाते रहें-
किसी कल्पना को दृश्मान करना का तरीका
आरामदेह कपड़ों को पहनें।
शान्त जगह पर लेट जाएं, और अपनी आंखें बन्द कर लें।
खुद को ढीला छोड़ दें।
सभी इंद्रियों से महसूस करें। कल्पना करें आप
एक बड़े उद्यान में हैं,फलों की खुशबू
आपके मुंह में पानी ला रही है, पक्षियों की
चहचहाट, और घंटियों की
आवाज कानों में मधुर झंकार पैदा कर रही है। कुछ दूर पर झरना है, थोड़ा सा चलें और ठण्डे पानी को महसूस करें।
सकारात्मक सोच को ही अपनाएं। नकारात्मक सोच को
दूर करने की कोशिश करें।
दिन में कम से कम तीन बार यह प्रक्रिया करें और
कुछ समय बाद ही आप स्वयं में बदलाव महसूस करेंगे और देखेंगे।
कल्पनाओं को सजोने की तकनीक के लिए कुछ टिप्स
ध्यान में रखने होंगे-
इस तकनीक को लेटने की अवस्था में ही करने की
कोशिश करें। यह वैसे बैठकर भी हो सकता है।
सीधे और सरल तरीके से अपने टारगेट पर पहुंचे।
सीधी और सरल तस्वीरों को जेहन में रखें ,उलझी तस्वीरों से आप स्वयं को भ्रमित ही करेंगे।
अपना स्वयं का नजरिया बनाएं और ऐसी भाषा काम
में लें जिसमें आप सुविधा महसूस करें।
इस सारे व्यायाम को करने के पश्चात धीरे-धीरे
अपनी आंखें खोले। एकदम से उठकर काम करने और चलने फिरने न लगें। खड़े होने से पहले स्वयं को पांच मिनट का समय दे।
किसी भी व्यायाम के तुरन्त बाद आपके शरीर में साइक्लॉजिकल परिवर्तन होते हैं।
थोड़ा-सा रक्तचाप और शरीर का तापमान भी बढ़ता है। इसलिए सावधान रहें जब कोई
व्यायाम करें, तो एकदम से न
उठें। थोड़ी देर आंखें खोलकर लेटे रहिए। फिर करवट से लेटे और हाथ के सहारे से उठकर
बैठें। धीरे से उठे।
यह प्रक्रिया आपको व्यायाम के बाद चक्कर आने की
बीमारी से निजात दिलाएगी।
अब अंत में स्वयं की पीठ थपथपाएं और कहें बहुत
अच्छा और अपने काम में लग जाएं।
-मेखला
वीकएंड और आपकी बुकशेल्फ
किताबें और वीकएंड ये क्या कॉम्बीनेशन है? वीकएंड
पर किताबों का क्या काम? जी हां, किताबों को पढऩे
के लिए नहीं हम उन्हें व्यवस्थित करने की कह रहे हैं।
सीमा पढऩे में अच्छी है,रहती
भी तरीके से है। अधिकतर चीजों में सफाई पसन्द भी है, लेकिन उसकी एक
बुरी आदत है वह अपनी किताबों को बड़ी बेतरतीबी से रखती है। कभी कहो तो एक ही जवाब
टाइम नहीं है। यह सही है कि आम दिनों में बुकशेल्फ ठीक करने का समय नहीं रहता
लेकिन ऐसा भी नहीं होता कि कभी उसे ठीक ही न किया जाय। अगर एक बार व्यवस्थित कर
दिया जाय तो फिर दोबारा संभालने में ज्यादा समय और मेहनत नहीं लगती। जो किताबें
पढ़ते हैं, तो उन्हें व्यवस्थित भी रखना चाहिए ये आपके
ज्ञान के साथ आपके सलीके को भी दर्शाती हैं।
क्या करें ??
सारी किताबों को एक जगह करें।
उन्हें अच्छे से झाड़े और उनके बीच में अगर कोई
पेन-पेन्सिल या कोई अन्य चीज लग रही हो तो
उसे निकाल दे। हमेशा बुकमार्क इस्तेमाल करें। जरूरी नहीं बुकमार्क बाजार से लाएं
जाय ये आप स्वयं भी बना सकते हैं।
किताबों की बाइन्डिग लूज हो रही होतो उसे
तुरन्त टाइट करें अन्यथा बांइड होने के लिए दें।
किताबों की कैटगरीज बनाएं जैसे मैगजीन,कोर्स
की किताबें या कम्पीटेटिव बुक्स सभी को अलग-अलग करें।
वैसे तो समय-समय पर मैगजीन को रद्दी में
निकालती रहें लेकिन अगर आपको कलेक्शन का शौक है तो मैगजीन को नम्बर से लगाकर
बाइन्ड करा लें इससे आपके पास अच्छा और व्यवस्थित संग्रह हो जाएगा।
ऐसे संग्रहों पर बैक में पेपर लगा कर कबसे कब
तक का संग्रह है लिख दें इससे शेल्फ में से निकालते समय आसानी रहती है।
फटी-पुरानी किताबें जिन्हें आप अब इस्तेमाल
नहीं करने वाली,किसी पुस्तकालय में या फिर ऐसी दुकानों पर वापस
कर दें जो पुरानी किताबें लेते हों।
किताबों को लिटाकर रखने के बजाय खड़ा करके रखें
और पीछे का हिस्सा आगे रखें इससे किताबें व्यवस्थित तो लगती ही हैं। उन्हें ढूढऩे
में भी परेशानी नहीं होती।
किताबों को कवर करके रखें इससे किताबें
सुरक्षित रहने के साथ सुन्दर भी लगती हैं।
गत्ते वाली किताबों को किनारे पर रखें इससे वे
बिना बाइंन्डिग वाली किताबों को सपोर्ट करने का काम करती हैं।
पुरानी किताबें जिन्हें आप संग्रहित करना चाहते
हैं उन्हें प्लास्टिक के कवर और बाइन्डिग में रखें और समय-समय पर निकालकरपलटती
रहें इससे पन्नों पर सीलन नहीं आएगी।
दो एक वीकएंड पर तो आपको बोरियत हो सकती है, लेकिन
जब कोई आपका बुक शेल्फ देखकर आपकी प्रशंसा करेंगें तो आपको इसकी सार्थकता समझ में
आएगी। आप स्वयं भी कुछ दिनों में अपनी किताबों के प्रति आकष्टर्ï हो
जाएंगी। जिन किताबों को आप हाथ नहीं लगाना चाहती थीं उन्हें पढऩे काम मन करेगा।
अच्छी किताबें आपकी दोस्त और मार्गदर्शक होती हैं। इन्हें भी सफाई की दरकार होती
है इसलिए इन्हें सुरक्षा दें। जिससे ये आपको ज्ञान की रोशनी दें।
वजन कम करें...
आउच... क्या हुआ भागते हुए भारती की मम्मी कमरे
की तरफ आई तो देखा वह अपने हाथ को दबाए दर्द से कराह रही है। उसके हाथ में मोच आ
गई थी। भारती जैसे कई लोग हैं जो मोटापे को कम करने के लिए ऐसे हादसों का शिकार आए
दिन होते रहते हैं। कुछ को मोच किसी को सूजन और कई तो हड्ïिडयां
ही तुड़पवा बैठते हैं।
व्यायाम शुरु करने से पहले जरूरी है शरीर को
उसके लिए तैयार करना जो अधिकांश लोग नहीं जानते और कुछ जानते भी हैं तो इसे
गंभीरता से नहीं लेते। कोई भी व्यायाम शुरु करने से पहले शरीर को उसके लिए तैयार
करना पड़ता है, जिसके लिए वार्मअप एक्सरसाइज होती हैं। जो शरीर
के जोड़ों को खोलती और शिराओं में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाती हैं, जिससे
हमारे शरीर का तापमान बढ़ता है। अचानक पडऩे वाले दबाव से यह हमारे दिल की भी रक्षा
करता है।
कुछ वार्मअप एक्सरसाइज
हर व्यायाम को कम से कम पांच बार अवश्य करें।
कार्डिआवास्कोलर क्रिया ऐसे करें जैसे आप
साइकिल चला रहे हैं, दौड़ रहे हैं। अधिकतर व्यायामों में हाथों पर
जोर ज्यादा पड़ता है इसलिए फ्री-हैंड एक्सरसाइज हाथों के जोड़ खोलने और लचीला
बनाने में बहुत मदद करती है।
व्यायाम करते समय बीच बीच में हिप्स पर जोर
नहीं देना चाहिए ।
जोड़ो की तकलीफ या हड्ïिडयों
में सूजन वाले लोगों को ऐसे व्यायाम नहीं करने चाहिए।
आब्जेक्टिव:
बाजार में कई तरह की फुट मसाजर या लेग मशीन आ
रही हैं जिनसे अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल करें।
मशीन पर अंगूठों के साथ आगे की ओर धक्का दें
एडिय़ों को सहारा न दें। पैरों को सीधे रखें जब तक आपके घुटने दबाव महसूस न करें।
पैरों के अंगूठे सामने की और रखते हुए घुटने
मोड़े और एडिय़ों पर दबाव बनाएं रखें जब तक पिड़लियों की शिराओं पर दबाव न होने
लगे।
सावधानी स्पान्डलिटस और जोड़ो के दर्द वाले यह
व्यायाम न करें।
तेजी से कूदना
उद्ïदेश्य: यह
व्यायाम कूल्हों ,जांघों और पिंडली की कोशिकाओं को मजबूत करता
है।
कैसे करे- सीधे खड़े हो जाएं हाथों को भी शरीर
की सीध में नीचे की ओर रखें।
हाथों को पंख की तरह फैलाते हुए कूदें
१-२ सैकंड का विराम लें फिर उसी तरह कूदें
यह व्यायाम कम से कम १०-१२ बार करें लेकिन बीच
में १-२ सैकंड का विराम जरूर देते रहें।
विशेष- शरीर के ऊपरी भाग को नीचे के भीग की तरह
सीधा रखें
ज्यादा इधर-उधर न झुकें
व्यायाम करते समय दोनों पैरों में दूरी न हो
सावधानी- यह एक्सरसाइज घुटने कूल्हों और जोड़ों
के दर्द आदि से पीडि़त लोगों को नहीं करनी चाहिए।
बट एक्सरसाइज सिर से किया जाने वाला व्यायाम
यह व्यायाम कई लाभ देता है उदर पुर्नउत्पादन और
उत्सर्जन संबधी तंत्र को ठीक रखता है तो शरीर को लचीला,फुर्तीला
और मजबूत भी बनाता है
रहना है खिला-खिला
अक्सर कामकाजी महिलाओं को ऑफिस या बाहर अनचाही
बातें सुननी पड़ जाती हैं। इन्हें गम्भीरता से न लेकर सहजता से लेना और समाधान
करना ही उचित होता है। सीधी सी बात है किसी की गलती के लिए आप क्यों दुखी हों...
आप को तो रहना है खिला खिला
सभी
सहकर्मियों से सहज व्यवहार करें। किसी की व्यर्थ आलोचना में न पडक़र स्वयं को तनाव
रहित रखें।
काम
में परेशानी आने पर पूछकर कार्य करने में कोई हानि नहीं। समय की बरबादी के साथ
परेशान होने से भी बचेंगी।
छोटी-मोटी
अप्रिय बातों को अनुसुनी करके या शांत रहकर वातावरण को सहज रखा जा सकता है।
काम
योजनाबद्ध और सलीके से करें जिससे सभी को आपके साथ काम करने में खुशी हो।
छोटी-छोटी
बातों को लेकर अपने साथियों से उलझना ठीक नहीं।
अगर
कुछ गलतफहमी हो तो तुरन्त दूर करें।
चुगलखोरी
और चुगलखोर दोनों से बचें।
काम
में कमी की वजह से बॉस अगर नाराज होते हैं, तो कमी दूर
करें। न कि उल्टा-सीधा सोचकर दिमाग खराब करें।
हर
समय काम की अधिकता का रोना नहीं रोएं।
छुट्टïी
के दिन आराम और मनोरंजन करके अगले सप्ताह के काम के लिए ऊर्जा से भरपूर रहें।
खुश
रहेंगी तो स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और हर क्षण का भरपूर आनन्द लिया जा सकेगा।
-गुंजन शाह
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