बादल आया, बादल आया
सूरज चाचा ने धमकाया
तो उसने पानी बरसाया
पानी चारों और फैलाया
धरती ने अपना चेहरा धुलवाया
बादल आया, बादल आया
आसमान भी फिर मुसकाया
बोला थोड़ा आराम है आया
जब बादल ने है जल बरसाया
पेड़ों का भी है जी हरषाया
बादल आया बादल आया
@ मेखला
यह कविता मुझे मेरी माँ सुनाया करती थीं पर कुछ हिस्से मैं भूल गई जिन्हें मैंने अपने हिसाब से जोड़ दिया-
क की कोयल कूक रही है, ख खरगोश खड़ा है
ग की गैया बैठी भैया, घ का घड़ा पड़ा है
आगे बोलो ङ खाली, सभी बजाओ ताली
च से चमके चंदा मामा छ का छप्पर छाए
ज से बने जलेबी देवी झ का झंडा फहराए
आगे बोलो ञ खाली सभी बजाओ ताली
ट की टोह लिए सपेरा, ठ से ठोके भाला
ड से डम डम बोले डमरू, ढ की ढाप लगाता
आगे बोलो ण खाली सभी बजाओ ताली
त का तबला लिए तबलची
थ की थाप लगाता
द से दुनिया जोड़ रही
ध से धन का नाता
आगे बोलो न नाली
सभी बजाओ ताली
प पतंग के पेंच लड़े हैं
फ के फुग्गे फूले
ब के बाग़ बगीचों में
भ से भवंरे डोले
आगे बोलो म माली
सभी बजाओ ताली
य से याद पाठ करते हैं हम, र से रट्टा ना मारे हम
ल से लिखते हैं हम, व से वतन को प्यार करते हैं हम
श से शलगम बन जाये,
ष से षटकोण बनाये
स से सफलता लगे है प्यारी,
ह से हल हो जाये जब मुश्किल सारी
क्ष से क्षत्रिय थे श्रीराम,
त्र से त्रिशूल थामे शिव भगवान
ज्ञ से ज्ञान का थे भंडार,
श्र से श्रवण करे उनके पाठ|
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अ से अनार आ से आम
अब आ जाओ करेंगे काम
इ से इमली ई से ईख
इन कामों से मिलेगी सीख
सुबह उठकर बड़ो को करो प्रणाम
जल्दी जल्दी पूरे करो नित काम
ब्रश करोगे जो अच्छे से
दांत रहेंगे मजबूत और चमके से
करोगे जो नित योग और व्यायाम
बीमारियों का होगा काम तमाम
अपने काम करोगे जो खुद से
आत्मनिर्भर हो जाओगे शुरू से
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