हम सबने अब ठाना
है,
शिक्षा को
सर्वत्र फैलाना हैl
हर बच्चे को मिले
शिक्षा जो पूरी,
देश की बदल जाएगी
तस्वीर, जो है अभी अधूरीl
पुरातन का नव्य
संस्करण है अब लाना,
साहित्य की गंगा
है बहानाl
सभ्यता क्या है
इस पर विचार है फरमानाl
न भूलने देनी है
संस्कृति अपनी,
बच्चों के रूप
में गढ़नी है कृति अपनीl
धन्यवाद
मेखला
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