विराम का मतलब, विश्राम, रुकना और
ठहरना है
शब्दों को समझना और परखना
है।
हर वाक्य को इनसे संवरना है, इनके साथ
ही चलना है
विराम नहीं विश्राम है, इसका अपना
अंदाज है।
इसकी अपनी पहचान है
विराम नहीं विश्राम है, देता शब्दों को
ठहराव है।
कभी शुरू में, कभी अंत पर लगकर,
देता भावों को पहचान है।
ये विराम नहीं विश्राम है, इसके कई
प्रकार हैं ।
शब्दों के हर पड़ाव पर लगती इसकी लगाम
है।
कभी दिखाता आदेश है, तो कभी तुल्यता का
अहसास है।
ये विराम नहीं विश्राम है, इसमें
जो ठहराव है।
वो
वाक्यों की पहचान है।
कभी
करता है प्रश्न खड़ा, तो कभी देता विस्मय का भान है।
ये विराम नहीं विश्राम है, इसमें
जो अंदाज है।
कभी
जोड़ता, कभी सोचता और कभी लेता अल्पविराम है।
ये
विराम नहीं विश्राम है, इनसे भावों में आती जान है।
@
मेखला
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