कुछ दिन पहले एक
बच्चे ने शिक्षिका से पूछा मैम आप कहती हैं हिन्दी हमारी राष्ट्रीय भाषा है । ये
तो बहुत बड़ी बात होती है न। फिर हम हिन्दी क्यों नहीं बोल पाते। घर में भी हिन्दी
बोलने पर मॉम-डैड डांटते हैं । जब बोलने
ही नहीं देते तो इसको राष्ट्रीय भाषा क्यों कहते हैं ।
लेकिन हम बस इसी
पीरियड में तो हिन्दी बोलते हैं बाकी में तो हम इंग्लिश ही बोलते हैं। हिन्दी में
बात करने पूछने पर तो सजा मिलती है न?
बच्चे के इस बेबाकी
से पूछे सवाल पर एक बारगी तो शिक्षिका मौन साध गई।
उन्होंने जैसे तैसे
बच्चे को समझाया की अंग्रेजी ग्लोबल भाषा है इसलिए उसकी जरूरत पर बच्चे के चेहरे
से साफ नजर आ रहा था कि वो अपनी टीचर की बात से सहमत नहीं है ।
टीचर भी सोच में पड़
गईं क्या हम सही जा रहे हैं?
ये तो एक वाकया है
ऐसे ही न जाने कितने सवाल बच्चों के मन में उमड़ते रहते हैं ।
हम कहाँ जा रहे हैं?
कहते हैं जड़ों से काटकर
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