'क' की कोयल कूक रही, 'ख' खरगोश खड़ा है...
'ग' से गैया, बैठी भैया, 'घ' का घड़ा भरा है...
आगे बोलो 'ङ' खाली, सभी बजाओ ताली...
'च' से चमके चंदा मामा, 'छ' से छप्पर छाया...
'ज' से बने जलेबी देवी, 'झ' का झंडा फहराया...
आगे बोलो 'ञ' खाली, सभी बजाओ ताली...
'ट' से बने टमाटर, 'ठ' से ठोको ताली...
'ड' से डमरू बजता, भैया, 'ढ' ढोलक बजवाई...
आगे बोलो 'ण' खाली, सभी बजाओ ताली...
'त' क तबला लिए तबलची, 'थ' की थाप लगाता...
'द' की दुनिया जोड़ रही, 'ध' से धन का नाता...
जोर से बोलो 'न' नाली, सभी बजाओ ताली...
'प' पतंग के पेच लड़े हैं, 'फ' के फुग्गे फूले...
'ब' से बाग़ बगीचों में, भ से भवरें डोले...
आगे बोलो 'म' माली, सभी बजाओ ताली...
'य' से यज्ञ किया साधु ने, 'र' से रस्सी बांधी...
'ल' से लोटा होता, 'व' से वायु की चलती आंधी...
'श' से शलगम उगती है, 'ष' से षट्कोण है बनता...
'स' से सरगम बने, जो 'ह' से हारमोनियम बजता...
'क्ष' से क्षत्रिय घूमे लेकर, हाथ में 'त्र' से त्रिशूल...
'ज्ञ' से ज्ञानी जो भी पढ़ाएं, कभी न उसको भूल..
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