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एक सोच को हकीकत में बदलें खाना बिगड़ता देखकर बहुत तकलीफ होती है। हम बहुत भाग्यशाली की हमें खाना मिल रहा है।

क्या करें? झूठा छोड़ना पड़ रहा है!

 खाने की कीमत नहीं वो अनमोल है और हम बहुत भाग्यशाली की हमें खाना मिल रहा है।

पैक्ड थाली में मिलने वाले खाने को झूठा छोड़ा जाना गलत होने के साथ एक समस्या भी है।  

समस्या इसलिए की लोगों को न चाहते हुए भी खाना झूठा छोड़ना पड़ता है।

हमारे ऑफिस में लंच पार्टी थी।  बाहर से खाना आया था।  सबके नाम की थाली थी। सबने थाली का ढक्कन हटाया और जितना खा सके खाया बाकी डस्टबिन के हवाले किया।

पर मैंने देखा कईयों की थाली में काफी सारा खाना छूट गया था, जो की डस्टबिन के हवाले हो गया था। देखकर बहुत तकलीफ हुई। कईयों को टोका भी तो उनका कहना था हम भी बिगाड़ना नहीं चाहते थे पर खाना कहाँ निकालते?

जब उनकी परेशानी समझ आई की वाकई खाने को कम भी करते तो कहाँ? तब जाकर दिमाग की बत्ती जली अगर उस वक्त कुछ खाली डोंगे वहां रख दिए जाते सर्विंग स्पून के साथ तो अच्छा होता।

लोगों को जितना चाहिए होता उसमें कम कर सकते थे। और जिनको अतिरिक्त चाहिए उसमें से ले सकते थे।  बाकी के खाने को जरूरतमंद को दिया जा सकता था। इससे अन्न के अपमान से भी बच जाते।  

ये सब मैं इसलिए लिख रही हूँ की हर कहीं ऐसी पार्टी होती रहती हैं और अगर आप सब को भी ये तरीका अच्छा लगे तो अपना सकते हैं और खाने को जरूरतमंद तक पहुंचा सकते हैं।   

मेखला

 

और अपनी किसी पोस्ट के लिए तो नहीं पर इस पोस्ट के लिए जरुर कहना चाहूंगी की इसे जितना शेर कर सकें करें।  और एक सोच को हकीकत में बदलें।  

 

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