अरे किशू कितनी बार कहा है कोल्ड्रिंक
मत पिया कर
देखा नहीं था कैसे टॉयलेट क्लीनर का
काम करता है ये!
माँ लेकिन इन कोल्ड्रिंक का कितना एड
आता है|
बेटा उन लोगों को ऐसे प्रोडक्ट को
प्रमोट करने के पैसे मिलते हैं | इसलिए वो किसी भी बेकार चीज की भी तारीफ़ कर देते हैं|
हां वो खुद भले ही इन चीजों का इस्तेमाल न करें पर लोगों को तो बरगला ही देते हैं|
पर माँ इन लोग के पास तो काफी पैसे
होते होंगे फिर इन्हें क्या जरुरत होती है ऐसी गलत चीजों को प्रमोट करने की|
बस भी कर मैंने झुंझलाते हुए कहा और इस बात को टालते हुए मैंने बेटे को अन्य बातों में
व्यस्त कर दिया पर मन के किसी कोने में मेरे भी खलबली मच गई की इतने पैसे होने के बावजूद
भी वो क्या कमी रह जाती है, जो ऐसे लोग गलत को गलत और सही को सही नहीं कह पाते| किसलिए
गलत कामों से रूपये कमाने की कोशिश करते हैं?
क्या इनके लिए
सामाजिक सरोकार जैसा कोई मुद्दा नहीं होता? क्या इनको नहीं लगता हम जिस समाज की
वजह से इतनी उन्नति कर रहे हैं उसके लिए हमे भी कुछ करना चाहिए?
मेखला
0 Comments