सुनकर
जो अपनी सी लगे,
हर
भाव की अभिव्यक्ति करे,
जो
सरल और सहज है,
निर्मल और निर्झर है,
जिसके
हर अक्षर में विज्ञान है,
जिसके
एक वर्ण में ब्रह्मांड है,
जिसमें हर रिश्ते कि अलग पहचान है
जो
दिल से दिल तक जाती है|
हां, वो हिन्दी है
जो हमारी मातृ भाषा कहलाती है
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