वो
दर्द से दुल्लर हुई जा रही थी| पर काम तेजी पर था मॉल के मालिक ने सख्त आदेश दे
रखे थे, जो भी काम के समय जरा सा भी बैठा नजर आया की नौकरी गई समझो| दर्द को सहते
हुए लोगों के सामने पुते हुए चेहरे से मुस्कान खींचने की कोशिश कर रही थी| पर दर्द
था की बस...
दीदी
बहुत दर्द हो रहा है आज पहला दिन है दवाई भी ले ली पर अब सहन नहीं हो रहा कहकर
गीता के आंसू गालों पर सरकने लगे| ममता को समझ नहीं आ रहा था की कैसे उसका दर्द
बांटे | क्योंकि मालिक ने नौकरी के साथ ही अपनी टर्म और कंडिशन बता दी थीं| कहा था
वाशरूम भी दिन में दो या तीन बार ही जा सकते हैं| बार-बार जाने से वो पगार से काटने में भी कोताही नहीं करते| वो
भी तो कई बार इस दौर से गुजर चुकी थी|
उसने
सोचा वो वक्त ही ऐसा था मेरे साथ कोई भी नहीं था, लेकिन इसके साथ तो मैं हूँ ना?
खुद
से ही बात करके वो मुस्कुराई और गीता से बोली तू यहाँ बैठ मैं आई |
वैसे
मालिक खडूस था पर जबसे ममता ने उसके बेटे को गिरने से बचाया है वो उसके लिए थोड़ा नर्म
हो गया था|
अब बात-बेबात
उसे डांटता नहीं था| उसने कहा भी था की
तुझे कोई भी मदद चाहिए तो कह देना |
ममता
अपने बॉस के पास जाकर बोली सर जी क्या ऐसा हो सकता है की हममे से कोई एक छुट्टी ले
और उसकी जगह दूसरा काम कर ले|
बोले
काम में परेशानी नहीं आनी चाहिए ले लो आज छुट्टी|
तो ठीक
है मैं गीता को बोल देती हूँ कि आज चली जाएगी घर|
बॉस
चौंकते हुए मैंने तो तेरे लिए छुट्टी दी है|
ममता-
सर जी आप इसे मेरी छुट्टी में ही गिन लेना बस सर जी मेरी जगह गीता को छुट्टी दे दो|
आज मैं उसके नाम की ड्यूटी कर लूंगी|
बॉस
बोला अभी नई-नई तो आई है, महिना भी पूरा
नहीं हुआ ऐसे कैसे छुट्टी दे दूँ?
मायूस
होते हुए ममता बोली सर जीआपने ही कहा था कभी कोई दिक्कत परेशानी आये तो बता देना सो
मैं चली आई थी बाकी अब आप ही देख लो|
बॉस
ने कुछ सोचकर हामी भर दी|
ममता
चहकते हुए गीता के पास आई और बोली चल आज तू घर जाकर आराम कर ले मैंने सर से परमीशन
ले ली है|
दर्द
से कराहते हुए गीता बोली दीदी पर पगार कट जाएगी तो..
तू चिंता
मत कर तेरी पगार नहीं कटेगी| अब जल्दी से घर जा और आराम कर |
गीता
के जाने के बाद ममता ने सुकून की साँस ली और गुनगुनाते हुए काम पर लग गई|
@ मेखला
गुप्ता
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