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ये बारिश की बूंदें और गरम गरम पकोड़े और ...... और अदरक वाली चाय

 

 


 
बारिश में चाय और पकोड़ों के शौकीन जरुर पड़े ..

उफ्फ ये बारिश भी ना जब भी आती है डाईट को भुलवा देती है।  इधर बारिश पड़ी उधर पकोड़ों और अदरक वाली चाय की खुशबू सीधी नाक के अंदर पहुंच जाती है।  हम चाहे कहीं भी हों, मन में पकोड़ों तलने लगते हैं।  जब घर पहुंचकर गर्मागर्म माँ के हाथ की पकोड़ियां और चाय मिलती थी तो वो मजा ही कुछ और हुआ करता था।  राजस्थान में तो बारिश के साथ ही पौष बड़ों का दौर शुरू हो जाता है जिसका स्वाद जगत में कहीं और नहीं मिल सकता।  साथ में लहसुन की चटनी!!

मुंह में पानी ना आ जाए तो कहना....   ये शौक ना शादी के पहले कम था और ना ही शादी के बाद कम हुआ।  शादी से पहले जब बारिश होती थी ऑफिस में सबसे पहले मम्मी को फ़ोन लगता था.. मेरे साथी भी फ़ोन उठाते ही कहते थे(क्योंकि तब लैंड लाइन फोन हुआ करते थे) अब मेखला कहेगी मम्मी पकोड़े... शादी के बाद शौक तो वहीं रहा बस जगह में इतना बदलाव हुआ की अब रसोई माँ नहीं खुद मैं सम्भाल रही थी।  पहले मैं जिद करने वाली थी अब मैं जिद पूरी करने वाली हो गई हूँ।  

खैर समय है बदलाव लाता ही है। माँ-पापा की जगह कोई नहीं ले सकता और उनका प्यार-दुलार उसका तो कहना ही क्या ? भले ही में वजन बढ़ रहा हो उनको कभी मैं मोटी नज़र नहीं आई। कहतीं, थोड़ी-सी पकौड़ी से कुछ नहीं होने वाला।  

शादी के कुछ सालों बाद उम्र की गिनती के साथ वजन भी निगोड़ा बढ़ने लगा है। ऐसा लोग कहने लगे हैं। पर मैंने कभी नंबर गेम नहीं खेला इसलिए कभी नम्बरों पर ध्यान भी नहीं दिया। 

अरे मेखला वजन पर भी ध्यान दो कहने वालों की बात पर मैं बहुत ध्यान देती हूँ... बस थोड़े से पकोड़े खाने के बाद। उनकी बात इसलिए ध्यान देने वाली इसलिए है क्योंकि वो मेरा भला चाहते हैं और मुझे लगता है दूसरी बात ये कि जिन्दगी न मिलेगी दोबारा, तो जरा सा सदुपयोग कर लिया जाय।  वैसे भी पकोड़ों और अदरक वाली चाय को इतना सम्मान देने वाले अब कुछ ही बचे हैं उनमें से हम एक हैं। नहीं तो अदरक वाली चाय की जगह ग्रीन टीन ने ले ली है और पकोड़ो की जगह चोकोज, म्यूसली और ओट्स ने ले ली है।  जिन्दगीं में रस तो कहीं रहा ही नहीं।  अब जुबां केसरी जैसे रसों से तो ये रस ज्यादा बेहतर हैं।  पकोड़ों ने ऑएली होने और बिलकुल ही अनहेल्दी खाने का बेड सर्टीफिकेट भले ही ले लिया हो।  पर वो हमारे दिल से जुड़ें हैं।  अब ऐसे लोगों को कन्विंस करने में दिमाग लगाने से ज्यादा हम पकोड़ों और चाय पर फोकस करते हैं।  राजस्थान का कहीं तो असर नजर आएगा ही।  दिल से राजस्थानी मेखला गुप्ता


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