मीरा, रहीम, कबीर, सूरदास सब
जग में चमके तारे हैं|
इनके नाम चहूँ ओर गुंजाते,
सबको ज्ञान एक सा दे जाते|
भेद नहीं था इनके मन में,
कर्मों से नहीं थी कोई लाज|
सबकी अपनी मंजिल थी,
और अपनी-अपनी राह|
जात नहीं रखती कोई माने,
काम से सब इनको जाने|
इनकी ख्याति इनका काम
इंसानियत ही इनकी पहचान|
मेखला गुप्ता
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