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तोे जिंदगी कुछ और ही होती....


दो बहनों के बाद जब मैंने धरती पर पदापर्ण किया तो घर में कुछ समय के लिए तो मायूसी छा गई। लेकिन मेरी किलकारी मां को ज्यादा दिन दुखी न कर पाई। पापा का रूखापन महसूस करने लायक मैं थी नहीं। मां की लाड़ भरी झप्पी ने मुझे इस संसार से रूबरू कराना शुरू कर दिया। पापा कन्स्टक्शन से जुड़े थे इसलिए आने जाने का कोई टाइम फिक्स नहीं था। इसलिए उनसे ज्यादा घुलमिली नहीं थी। वो मेरे लिए और लोगों की तरह ही अनजान थे। पापा को हर चीज मनमुताबिक ही चाहिए थी। इसलिए मां हमेशा डरी डरी भी रहती थी। मेरी दोनों बड़ी बहनें पापा के अनुसार ही ढल गई थीं। लेकिन तब मेरी उम्र कम थी इसलिए मुझे नहीं पता था कि मुझे क्या करना चाहिए। एक दिन पापा ने मुझे आते ही गोद में लिया तो मैं ना जाने क्यों रो पड़ी। बस एक-दो बार चुप कराने के बाद पापा को गुस्सा आया और उन्होंने मुझे तेजी से जमीन पर पटक दिया। गुस्साते हुए बोले जब भी गोदी लेता हूं रोने लगती है। मां मुझे संभालते हुए भर्राती आवाज में बोलीं अभी छोटी है जब तुम दिखते ही नहीं तो जानेगी कैसे!
उस दिन जो मैं पटकी गई तो सिर में गुम चोट आई। बाहर खून नहीं आया एक गुमटा बन गया, जिसे मां ने रोते-रोते पल्लू से दबाना शुरू कर दिया। समय के साथ-साथ मेरे सिर में दर्द बढ़ने लगा। गर्मी में तो यह असहनीय हो जाता था। घर में सब जान गए थे गर्मी मेरे लिए कितनी कष्टदाई है।
बड़े होने के साथ दर्द भी बढ़ता जा रहा था। लोकल डाॅक्टर को दिखाते तो वो ऐसे ही दर्द की दवा दे देते। किसी ने मां को सलाह दी दिल्ली में डाॅक्टर को दिखाओ। डाॅक्टर को दिखाया तो उन्होंने देखते ही पूछ लिया सिर में कभी चोट लगी थी क्या! मां ने झूठ बोलते हुए कहा सोते में पलंग से गिर गई थी।
डाॅक्टर ने बोला जब गिरी थी तब खून बाहर न बहकर अंदर ही बहने लगा और उसकी ही गांठ बन गई है जो आॅपरेशन के बगैर नहीं दूर होगी।
बड़ा आॅपरेशन किया गया। मां हर समय मेरी ढाल बनकर खड़ी रहीं। गांठ तो निकल गई पर उसकी वजह से चेहरा मोहरा थोड़ा बदल गया। पिताजी को अपनी गलती का अहसास होने लगा था। पर अब हालात उनके काबू से बाहर थे। मेरी शादी हुई एक बेटा भी हुआ। ससुराल में किसी को नहीं पता था कि मैं किस दर्द से गुजर रही हूं। बेटे के जन्म के समय जब घर आई तो पापा ने माफी भी मांगी कि मेरे गुस्से ने तेरी जिंदगी नर्क बना दी। उनके साथ रोते हुए उन्हें कहा भी उनकी गलती थी नहीं है मेरे नसीब में ये ही लिखा था। पर कहीं ना कहीं मन ये भी कह रहा था कि अगर पापा उस दिन गुस्सा ना करते तो मेरी जिंदगी शायद कुछ और ही होती।

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