बच्चों के लिए जन्मदिन का मतलब केक और गिफ्ट, पर कुछ दशकों पहले घर में दावत और हाँ उपहार तब भी थे। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही था। मुझे भी जन्मदिन पर मिलने वाले गिफ्ट्स का इंतजार रहता था। मेरा 7 वां बर्थडे आया, तो मैं सुपर एक्साइटेड थी, ऐसा मेरी मम्मी कहती थीं। सबसे पहले मौसी आईं। अब मौसी तो मौसी होती हैं। मैंने उनके घुसने से पहले ही सवाल दागा आपको पता है आज क्या है?
मौसी ने याद करते हुए कहा आज फलां-फलां दिन है। मैंने कहा और क्या है? तो मुस्कुराते हुए बोली मेरी छुट्टी है। मैं याद दिलाने की कोशिश करते हुए बोली, आपको कुछ भी याद नहीं है?
तभी मौसी के बच्चों ने मुझे बुला लिया तो मैं उनके साथ बिजी हो गई। थोड़ी देर में जैसे ही याद आया, तो मैं वापस मौसी के पास आई और पूछा अब कुछ याद आया? तो बोली हां सुशीला ने कहा था आज कुछ अलग बना रही हूं इसलिए आ जाओ। मैं रुआंसी सी हो गई। प्यार करते हुए बोली हां, बाबा मुझे याद है आज तेरा जन्मदिन है। मेरी मुठ्ठी में दस पैसे रखकर मुठ्ठी बंद करते हुए बोलीं (तब पांच, दस और बीस पैसे और चवन्नी भी चला करती थीं) ले गिफ्ट। मम्मी की ओर देखकर मुस्कुराने लगीं। मैंने उनको एक प्यारी की और अपने सामान के पास चली गई। अपने सामान में से एक टॉफी निकालकर लाई और बोली लो आपका खाना। मम्मी ने इस बात पर कसकर डांट लगाई तो मौसी ने प्यार करते हुए कहा अभी बच्ची है। घर में मौजूद सारे लोग मेरी इस बात पर बहुत हंसे।
मौसी ने मुझे गोदी में लेते हुए फिर छुपा हुआ गिफ्ट निकाला, जिसमें चाबी वाला डॉगी था, जो चाबी भरने पर गुलाटियां मारता था। मम्मी ने सबके जाने के बाद समझाया कि ऐसा नहीं करते, जैसा आज आपने किया। दस पैसे के बदले में खाने में टॉफी को लेकर मुझे काफी अर्से तक चिढ़ाया जाता रहा। मौसी कहती थी मैं गिफ्ट लाई हूं अब खाना तो खिलाएगी न।
मौसी ने याद करते हुए कहा आज फलां-फलां दिन है। मैंने कहा और क्या है? तो मुस्कुराते हुए बोली मेरी छुट्टी है। मैं याद दिलाने की कोशिश करते हुए बोली, आपको कुछ भी याद नहीं है?
तभी मौसी के बच्चों ने मुझे बुला लिया तो मैं उनके साथ बिजी हो गई। थोड़ी देर में जैसे ही याद आया, तो मैं वापस मौसी के पास आई और पूछा अब कुछ याद आया? तो बोली हां सुशीला ने कहा था आज कुछ अलग बना रही हूं इसलिए आ जाओ। मैं रुआंसी सी हो गई। प्यार करते हुए बोली हां, बाबा मुझे याद है आज तेरा जन्मदिन है। मेरी मुठ्ठी में दस पैसे रखकर मुठ्ठी बंद करते हुए बोलीं (तब पांच, दस और बीस पैसे और चवन्नी भी चला करती थीं) ले गिफ्ट। मम्मी की ओर देखकर मुस्कुराने लगीं। मैंने उनको एक प्यारी की और अपने सामान के पास चली गई। अपने सामान में से एक टॉफी निकालकर लाई और बोली लो आपका खाना। मम्मी ने इस बात पर कसकर डांट लगाई तो मौसी ने प्यार करते हुए कहा अभी बच्ची है। घर में मौजूद सारे लोग मेरी इस बात पर बहुत हंसे।
मौसी ने मुझे गोदी में लेते हुए फिर छुपा हुआ गिफ्ट निकाला, जिसमें चाबी वाला डॉगी था, जो चाबी भरने पर गुलाटियां मारता था। मम्मी ने सबके जाने के बाद समझाया कि ऐसा नहीं करते, जैसा आज आपने किया। दस पैसे के बदले में खाने में टॉफी को लेकर मुझे काफी अर्से तक चिढ़ाया जाता रहा। मौसी कहती थी मैं गिफ्ट लाई हूं अब खाना तो खिलाएगी न।

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