प्यार हमे किस मोड़ पे ले आया
जयपुर की बात है, तब मैं नौ-दस साल की थी। बच्चों की पिटाई आम बात थी। स्कूल में भी और घर पर भी लोग बच्चों की धुनाई करते थे। पर हमारे मामले में थोड़ा अलग था। हम पहले से ही इतने ज्यादा सेंसटिव थे कि मम्मी-पापा पिटाई तो दूर डांटते भी नहीं थे। इसलिए पिटाई का अहसास भी नहीं आया था। 1982 में फिल्म आई थी ‘सत्ते पे सत्ता’। उसका गााना ‘प्यार हमे किस मोड़ पे ले आया...’ मुझे बहुत अच्छा लगता था। मुझे गाना गाने का नया चस्का भी लगा था, सो मैं जब देखो तब उस गाने का ऊंचे स्वर में गाती रहती।
एक दिन पापा के दोस्त और उनके बच्चे घर आए हुए थे। पापा किसी गंभीर मुद्दे पर अंकल के साथ चर्चा कर रहे थे। मैं अपनी तान छेड़ती हुई वहां से निकली। फुल वॉल्यूम पर ‘प्यार हमे किस मोड़ पर ले आया...’ गाते हुए जा रही थी, कि पापा ने कहा बेटा ये गाना मत गा। वैसे भी तब गाने वाने का इतना जोर नहीं था। मैं दो मिनट चुप रही, फिर चालू हो गई सप्तम स्वर में। पापा ने दो तीन बार मुझे मना किया पर कुछ देर चुप रहती और फिर गाना शुरू कर देती। पापा ने कहा इस बार चुप नहीं हुई, तो पिटाई भी हो सकती है। पर उस समय पिटाई के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था, तो अपनी धुन में फुल वोल्यूम पर फिर से गाना गाने लगी। तभी पापा आए और गाल पर एक झनझनाता-सा तमाचा लगाते हुए बोले ‘ले प्यार तुझे इस मोड़ पे ले आया’। सबके सामने अपनी इतनी जोरदार बेज्जती से मैं हक्की बक्की रह गई। फिर बुक्का फाड़ कर जो रोई, तो घर भर को सिर पर उठा लिया। पापा ने भी खूब मनाया, लेकिन बात तो मन पर अटक गई थी। खैर, जैसे-तैसे खिलोने के प्रलोभन पर आकर हम भी मान गए और माहौल ठंडा हुआ। उसके बाद तो जब भी ये गाना सुनते, तो सब हंसते हुए कहते, ‘मेखला प्यार हमें किस मोड़ पर ले आया एक बार गा दे।’ घर में आज भी जब कभी ये गाना बजता है, चेहरे पर हंसी आ जाती है।
एक दिन पापा के दोस्त और उनके बच्चे घर आए हुए थे। पापा किसी गंभीर मुद्दे पर अंकल के साथ चर्चा कर रहे थे। मैं अपनी तान छेड़ती हुई वहां से निकली। फुल वॉल्यूम पर ‘प्यार हमे किस मोड़ पर ले आया...’ गाते हुए जा रही थी, कि पापा ने कहा बेटा ये गाना मत गा। वैसे भी तब गाने वाने का इतना जोर नहीं था। मैं दो मिनट चुप रही, फिर चालू हो गई सप्तम स्वर में। पापा ने दो तीन बार मुझे मना किया पर कुछ देर चुप रहती और फिर गाना शुरू कर देती। पापा ने कहा इस बार चुप नहीं हुई, तो पिटाई भी हो सकती है। पर उस समय पिटाई के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं था, तो अपनी धुन में फुल वोल्यूम पर फिर से गाना गाने लगी। तभी पापा आए और गाल पर एक झनझनाता-सा तमाचा लगाते हुए बोले ‘ले प्यार तुझे इस मोड़ पे ले आया’। सबके सामने अपनी इतनी जोरदार बेज्जती से मैं हक्की बक्की रह गई। फिर बुक्का फाड़ कर जो रोई, तो घर भर को सिर पर उठा लिया। पापा ने भी खूब मनाया, लेकिन बात तो मन पर अटक गई थी। खैर, जैसे-तैसे खिलोने के प्रलोभन पर आकर हम भी मान गए और माहौल ठंडा हुआ। उसके बाद तो जब भी ये गाना सुनते, तो सब हंसते हुए कहते, ‘मेखला प्यार हमें किस मोड़ पर ले आया एक बार गा दे।’ घर में आज भी जब कभी ये गाना बजता है, चेहरे पर हंसी आ जाती है।
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