हर-हर बोले, शिव शंभू भोलेl
शिव शांत हैं, महिमा अपार है,
कालों के भी काल, ये महाकाल हैंl
दुखों को हर जाते हैं इसलिए रुद्रदेव
कहाते हैं
हर हर बोले, शिव शंभू भोलेl
जब-जब इनका डमरू डोले,
तीसरा नेत्र ये खोलें,
सृष्टि खाने लगे हिचकोलेl
हर-हर बोले, शिव शंभू भोले
विष कंठ में रोकते,
नाग गले में खेलते,
शीश चन्द्र लगायें हैं चद्रशेखर कहलायें
है
गंगा को जटा में समायें हैं इसलिए गंगाधर
भी बुलाएँ हैंl
हर-हर बोले, शिव शंभू भोलेl
इनकी महिमा न जाए बखानी
ये चेतना के अन्तर्यामी
हर भक्त पर करें कृपा
ये जगत के दुखहर्ताl
@ मेखला
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