मां बाप की इकलौती बेटी थी घर में लाड प्यार के साथ खुद को निखारने का भी पूरा मौका मिला था। शुरू से ही पढ़ने लिखने में अच्छी होने की वजह से डॉक्टरी लाइन में आने में ज्यादा परेशानी भी नहीं हुई। पैर जमीन पर नहीं पड़ते थे खुशी के मारे की किस्मत किस कदर मेहरबान है मुझ पर। पर कहते हैं ना कभी-कभी खुद की ही नजर स्वयं को घायल कर देती है। डॉक्टरी पूरे होने के कुछ दिनों बाद कजिन की शादी में जाने का बुलावा आया। शादी में जाने पर बहुत खुश थी। उम्र का असर भी था जो उन दिनों मैं काफी निखरी-निखरी नजर आ रही थी। शादी में ही उस शहर के एक ओहदेदार परिवार का भी आगमन हुआ। परिवार के मुखिया ने दूर से मुझे देखकर मेरे चाचा से मेरे बारे में सारी जानकारी इकठ्ठा की और अपने बेटे के लिए उनसे बात करने को कहा। चाचा ने पिताजी से जब बात की तो पापा तो खुशी से फूले नहीं समाए।
बेटे के बारे में भी ज्यादा छानबीन नहीं की गई बस इतनी ही कि उसने एमबीए किया हुआ है। तब आज की तरह तो सोशल साइटस और फोन की सुविधाएं होती नहीं थी। इसलिए मैं भी कुछ ज्यादा जान नहीं पाई और पापा की सहमति में ही अपनी स्वीकृति दे दी। लेकिन क्या पता कि मेरे बुरे दिनों की शुरुआत होने वाली है।
मन में सपने संजोए शादी करके चंडीगढ़ आ गई। कुछ दिन सब ठीक ठाक रहा। मैंने पति से कहा जब तुम काम पर जाओगे तो मैं भी अपनी प्रैक्टिस शुरू कर लूंगी। इन्होंने कुछ कहा नहीं और थोड़े दिन फिर उड़ गए। मैंने कहा तुम जॉब पर नहीं जाओगे क्या? तो बिगड़ते हुए बोले मैं काम पर नहीं जाता।
मेरे लिए यह सन्न करने वाली घटना थी। मैंने कहां पर आपने एमबीए किया है तो कुछ सोचकर ही किया होगा ना कि आपको जीवन में कुछ करना है। बोले डिग्री थी ले ली। बस अब ज्यादा बहसबाजी नहीं होनी चाहिए।
और हां तुम भी अब घर पर ही रहोगी। मां-पापा ने कहा इस घर की बहू काम नहीं कर सकती। मैंने कहा पर मैंने तो शादी से पहले ही बता दिया कि मैं शादी के बाद अपनी प्रैक्टिस जारी रखूंगी।
हां तो अब मन बदल गया तो।
अब तो तीनों मिलकर मुझे प्रताड़ित करने लगे। मैं उस घर में शोपीस के जैसे हो गई। थोड़े दिन में पति ने अपने रूपरंग दिखाने शुरू कर दिए पीना पिलाना चालू हो गया। दोस्तों की महफिलें लगने लगीं। पति ने मारपीट भी चालू कर दी। सास ने कहा ये सब तो चलता ही है। थोड़े दिनों में पता चला मैं मां बनने वाली हूं। तो थोड़ा सास ससुर की तरफ से सुकून मिलने लगा। लेकिन पति का रवैया बिगड़ा ही रहा।
नौ महीने बाद बेटे के होने के बाद मुझे लगा अब शायद घर के लोगों का ढंग बदल जाए। पर ऐसा कुछ होने की बजाए वो मेरे साथ और ज्यादा मारपीट करने लगे। घर के काम करने वाले भी उनके डर से मेरी बातों को किसी तक पहूंचाने में डरते थे। मैंने एक से कहकर पुलिस में शिकायत करी तो पुलिसवाले घर आकर ससुर जी को सब बता गए। और मेरी जिंदगी नर्क से बदतर हो गई। सास बेटे को मुझे नहीं लेने देती। मैं उसकी झलक पाने के लिए घंटों-घंटों राह तकती कि कैसे न कैसे एक झलक मिल जाए।
पापा मेरी इस स्थिति को देखकर बेटे होने के कुछ महीनों बाद ही ये दुनिया छोड़ गए। उस बुरे वक्त में भी ससुराल वालों ने मुझे घर भी नहीं जाने दिया। जैसे-तैसे में वहां से भागकर घर आई। यहां मैंने जब पुलिस में शिकायत की तो पुलिसवालों ने कहा मैडम उनसे पंगा मत लीजिए उनका कुछ नहीं बिगडेगा आप सड़क पर आ जाएंगी। मैंने कहा वो में आ चुकी हूं पर अब मुझे अपने बेटे का वापस लेना है। मैंने कानूनी लड़ाई शुरू की पर यहां पर भी ससुराल वालों के रुतबे ने मेरे सारे तर्कों को फेल कर दिया। हर बार कोर्ट से तारीख पर तारीख पड़ने लगी। मैं बेटे की एक झलक को तरसने लगी।
मां के साथ मैंने दूसरे शहर में जगह बनाई जहां एक बार फिर मां ने मेरा सपोर्ट करते हुए मुझे दोबारा उठ खड़े होने का साहस दिया। बोलीं अब तुम्हे अपने लिए भी जीना शुरू करना होगा अपनी प्रैक्टिस को दोबारा शुरू करो। मैंने पूरा साहस बटोरते हुए जीवन की दोबारा शुरुआत की। आज भी अपने बेटे के लिए लड़ रही हूं...
बेटे के बारे में भी ज्यादा छानबीन नहीं की गई बस इतनी ही कि उसने एमबीए किया हुआ है। तब आज की तरह तो सोशल साइटस और फोन की सुविधाएं होती नहीं थी। इसलिए मैं भी कुछ ज्यादा जान नहीं पाई और पापा की सहमति में ही अपनी स्वीकृति दे दी। लेकिन क्या पता कि मेरे बुरे दिनों की शुरुआत होने वाली है।
मन में सपने संजोए शादी करके चंडीगढ़ आ गई। कुछ दिन सब ठीक ठाक रहा। मैंने पति से कहा जब तुम काम पर जाओगे तो मैं भी अपनी प्रैक्टिस शुरू कर लूंगी। इन्होंने कुछ कहा नहीं और थोड़े दिन फिर उड़ गए। मैंने कहा तुम जॉब पर नहीं जाओगे क्या? तो बिगड़ते हुए बोले मैं काम पर नहीं जाता।
मेरे लिए यह सन्न करने वाली घटना थी। मैंने कहां पर आपने एमबीए किया है तो कुछ सोचकर ही किया होगा ना कि आपको जीवन में कुछ करना है। बोले डिग्री थी ले ली। बस अब ज्यादा बहसबाजी नहीं होनी चाहिए।
और हां तुम भी अब घर पर ही रहोगी। मां-पापा ने कहा इस घर की बहू काम नहीं कर सकती। मैंने कहा पर मैंने तो शादी से पहले ही बता दिया कि मैं शादी के बाद अपनी प्रैक्टिस जारी रखूंगी।
हां तो अब मन बदल गया तो।
अब तो तीनों मिलकर मुझे प्रताड़ित करने लगे। मैं उस घर में शोपीस के जैसे हो गई। थोड़े दिन में पति ने अपने रूपरंग दिखाने शुरू कर दिए पीना पिलाना चालू हो गया। दोस्तों की महफिलें लगने लगीं। पति ने मारपीट भी चालू कर दी। सास ने कहा ये सब तो चलता ही है। थोड़े दिनों में पता चला मैं मां बनने वाली हूं। तो थोड़ा सास ससुर की तरफ से सुकून मिलने लगा। लेकिन पति का रवैया बिगड़ा ही रहा।
नौ महीने बाद बेटे के होने के बाद मुझे लगा अब शायद घर के लोगों का ढंग बदल जाए। पर ऐसा कुछ होने की बजाए वो मेरे साथ और ज्यादा मारपीट करने लगे। घर के काम करने वाले भी उनके डर से मेरी बातों को किसी तक पहूंचाने में डरते थे। मैंने एक से कहकर पुलिस में शिकायत करी तो पुलिसवाले घर आकर ससुर जी को सब बता गए। और मेरी जिंदगी नर्क से बदतर हो गई। सास बेटे को मुझे नहीं लेने देती। मैं उसकी झलक पाने के लिए घंटों-घंटों राह तकती कि कैसे न कैसे एक झलक मिल जाए।
पापा मेरी इस स्थिति को देखकर बेटे होने के कुछ महीनों बाद ही ये दुनिया छोड़ गए। उस बुरे वक्त में भी ससुराल वालों ने मुझे घर भी नहीं जाने दिया। जैसे-तैसे में वहां से भागकर घर आई। यहां मैंने जब पुलिस में शिकायत की तो पुलिसवालों ने कहा मैडम उनसे पंगा मत लीजिए उनका कुछ नहीं बिगडेगा आप सड़क पर आ जाएंगी। मैंने कहा वो में आ चुकी हूं पर अब मुझे अपने बेटे का वापस लेना है। मैंने कानूनी लड़ाई शुरू की पर यहां पर भी ससुराल वालों के रुतबे ने मेरे सारे तर्कों को फेल कर दिया। हर बार कोर्ट से तारीख पर तारीख पड़ने लगी। मैं बेटे की एक झलक को तरसने लगी।
मां के साथ मैंने दूसरे शहर में जगह बनाई जहां एक बार फिर मां ने मेरा सपोर्ट करते हुए मुझे दोबारा उठ खड़े होने का साहस दिया। बोलीं अब तुम्हे अपने लिए भी जीना शुरू करना होगा अपनी प्रैक्टिस को दोबारा शुरू करो। मैंने पूरा साहस बटोरते हुए जीवन की दोबारा शुरुआत की। आज भी अपने बेटे के लिए लड़ रही हूं...
0 Comments