Ticker

6/recent/ticker-posts

ऐसे पहुंचे संगरूर


35 साल पहले की बात है। हमारा स्कूल दोपहर का हुआ करता था इसलिए मैं और छोटी बहन घर पर थीं पापा के साथ। पापा का स्कूल भी दोपहर का था, वे हमें छोड़ते हुए अपने स्कूल जाते थे। मम्मी और जीजी यानी मेरी बड़ी बहन को लेकर सुबह वाली शिफ्ट में जाती थी। एक दिन अचानक से हमारी बड़ी बुआ पंजाब से आई। पापा घबरा गए कि क्या हुआ। पता चला कि किसी ने उनसे मजाक करा और उनको बोला कि फूफाजी के पापा नहीं रहे। बुआ-फूफाजी टैक्सी करके आए, तब पता चला कि वो फर्जी कॉल था। हमारा भी घर बुआ के ससुराल के पास ही था, तो बुआ हमसे भी मिलने आ गई थी और वापस जाने वाली थी। बातों-बातों में बुआ बोली भाई साहब मैं इन दोनों को ले जाउं, टैक्सी में हैं कोई दिक्कत नहीं होगी। मैं तब 8 साल की और छोटी 2 साल की थी। पापा बोले दोनों अभी बहुत छोटी हैं, हम गर्मियों में आएंगे। इधर बुआ कि बात सुनकर छोटी भी जाने के लिए रोने लगी। पापा बोले कि मुझे इनके कपड़े वगैरह भी नहीं पता कि कहां रखें हैं कैसे ले जा पाएगी? सुशीला(हमारी मम्मी) के आ जाने तक रुक जा फिर ले जाना। बुआ बोली रुक तो जाती भाईसाहब पर टैक्सी अभी तो जाने को तैयार है फिर वेटिंग का किराया बढ़ा देगा। इधर फूफाजी बोले आप बच्चों को हमारे साथ जाने दीजिए, कपड़े वगैरह की चिंता मत कीजिए। पापा ने कहा अकेली छोटी तो रह नहीं पाएगी। बुआ बोली मैं दोनों को ले जाने को कह रही हूं। गुंजन बड़ी क्लास में है इसलिए स्कूल मिस करना मुश्किल होगा और वैसे भी वो अभी स्कूल में है, नहीं तो मैं तीनों को ले जाती। खैर हम दोनों बिना किसी तैयारी के जैसे थे वैसे ही गाड़ी में बैठ गए। मम्मी-पापा के बिना हमारा यह पहला ट्रिप था। इधर मम्मी और जीजी घर पहुंचे, तो हम दोनों दिखाई नहीं दिए पापा ने कहा वो तो संगरूर के लिए रवाना हो गए। गाड़ी में बैठते ही कुछ देर तो सो गए और फिर खिड़की से सड़क का नजारा देखने लगे।
उन्होंने रास्ते में हमारे लिए कपड़े वगैरह खरीदे। घर पहुंचते ही मम्मी-पापा की याद सताने लगी। हम दोनों ही बुक्का फाड़ के रोने लगे। वो तो भला था कि दशहरा था तो पास ही रामलीला का मंचन था। बुआ हमें वह दिखाने ले गई। और बाकी दिन उनकी तैयारी की बातें करके हमें बिजी कर देती थी। बुआ की बेटियां हमे व्यस्त करने के नए-नए ढंग आजमाती। कुछ दिनों बाद मम्मी-पापा और जीजी आए, तो हम दोनों ही रोने लगे। पापा भी हमे गले लगाकर रोने लगे। थोड़ी देर बाद सभी का हंसते-हंसते बुरा हाल था कि कैसे हम पिता -पुत्रियों का मिलाप हुआ था।

Post a Comment

0 Comments

ठंडी हवा का झोंका