गुरु ज्ञान से जीवन में उजास है,
गुरु बिन सूना मन का आकाश है|
गुरु को बड़ा माना गोविन्द ने,
उनकी महिमा को माना सभी ने|
मन का मैल मिटाने वाला,
कीचड़ में कमल खिलाने वाला,
अँधेरे में रौशनी दिखाने वाला,
गुरु है ब्रह्म कहलाने वाला|
छल कपट की इस दुनिया में सही राह दिखाने वाला,
कोयले को हीरा बनाने वाला,
कच्ची मिट्टी को आकार दिलाने वाला,
गुरु होता है जिन्दगी संवारने वाला|
सही-गलत की पहचान कराता,
जिन्दगी के मायने समझाता|
हर बात को विचारों की छलनी में छ्नवाता,
गुरु ही है, जो सच कि तुला पर उनको नपवाता|
गुरु की महिमा ना जाय बखानी,
गुरु से बड़ा ना कोई ध्यानी|
गुरु होता है ऐसा पारस
परखे शिष्यों को जैसे हों वो हाटक
मेखला गुप्ता
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