Ticker

6/recent/ticker-posts

बस एक दिन का पर्व नहीं ये

 

आजादी है, आजादी, बस एक दिन का पर्व नहीं ये,

अब तक हमने जाना इसका मर्म नहीं है,

आजादी को जब सच में जानेंगे, तब उसका अर्थ पहचानेंगे|

हमने आजादी जो पाई थी,कीमत बहुत चुकाई थी|

देश पे मरने वालों ने हंसते-हँसते, देश पे जा लुटाई थी|

आजादी को जो हलके में लेते हैं,

15 अगस्त को महज एक छुट्टी कहते हैं,

जो नहीं जानते आजादी के सही मायने ,

वो क्या जानेंगे जिन्दगी के कायदे|

उनसे पूछो, जिन्होंने हर जख्म सीने पर झेले हैं,

धरती माँ के लिए जिस्म के कतरे-कतरे किये हैं,

वो भी किसी माँ के लाल थे, उनके भी परिवार थे,

पर आजादी के लिए लड़े थे वो, देश की सुरक्षा में डटे हैं वो|

@ मेखला

Post a Comment

0 Comments

ठंडी हवा का झोंका