आजादी है, आजादी,
बस एक दिन का पर्व नहीं ये,
अब तक हमने जाना इसका मर्म नहीं है,
आजादी को जब सच में जानेंगे,
तब उसका अर्थ पहचानेंगे|
हमने आजादी जो पाई थी,कीमत बहुत चुकाई थी|
देश पे मरने वालों ने हंसते-हँसते,
देश पे जा लुटाई थी|
आजादी को जो हलके में लेते हैं,
15 अगस्त को महज एक छुट्टी कहते हैं,
जो नहीं जानते आजादी के सही मायने ,
वो क्या जानेंगे जिन्दगी के कायदे|
उनसे पूछो, जिन्होंने हर जख्म सीने पर
झेले हैं,
धरती माँ के लिए जिस्म के कतरे-कतरे किये
हैं,
वो भी किसी माँ के लाल थे,
उनके भी परिवार थे,
पर आजादी के लिए लड़े थे वो,
देश की सुरक्षा में डटे हैं वो|
@ मेखला
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