बात तब की है जब मैंने 12th के बाद आईटीआई जॉइन किया था। पहली बार जब क्लास में एंट्री की तो एक मुस्कुराते चेहरे ने आगे अपनी सीट पर जगह बनाते हुए मुझे बैठने का इशारा किया। मैं भी जाकर वहां बैठ गई। हाथ मिलाते हुए बोली मैं अनुराधा। मैंने भी अपना नाम बताकर बात आगे बढ़ाई। अनुराधा जो मुझसे ऐसे खुलकर मिली जैसे वो मुझे बहुत सालों से जानती हो।
बातों का सिलसिला शुरू ही हुआ था कि सर आ गए। सर ने हमें क्लास के बारे में कुछ-कुछ बताया और हम सब से इंट्रोडक्शन देने को कहा। बोले आज की क्लास में बस ये ही है कल से पढ़ाई शुरू होगी। उसने मुझसे चार दिन पहले क्लास जॉइन की थी इसलिए उसने कैंपस और यहां के रूटीन के बारे में कुछ ही देर में बहुत कुछ बता दिया। कैंपस के बारे में बताने के बाद बोली अच्छा अब तुम भी कुछ बताओ कहा रहती हो? घर में कौन-कौन है?
मैं हंसती हुई बोली अरे बाबा बताती हूं, सब बताती हूं थोड़ी सांस तो लो।
वो बोली मुझे लगता है वक्त बहुत जल्दी निकल जाता है इसलिए हर काम फटाफट हो जाना चाहिए।
मैंने उसकी उत्सुकता को देखते हुए अपने घर के बारे में बताया। मम्मी-पापा और हम तीन बहनें हैं बनीपार्क में रहते हैं। मेरे से एक बड़ी और एक छोटी बहन है। हम कब अच्छी दोस्त बन गए पता ही नहीं चला। बाकी की क्लास वाली लड़कियां हमें बहनें मानने लगी थी। मुझे देर हो जाती तो वह बहुत परेशान होने लगती थी ऐसा क्लास की और लड़कियां ने बताया। एक दिन मैंने उससे पूछा तूने मेरे बारे में तो सब जान लिया पर अपने बारे में तू बातों को घुमा क्यों जाती है। बोली मेरे बारे में जानने को ज्यादा कुछ नहीं है। मैंने कहा ऐसा क्यों?
बोली मेरे 20 भाई बहन हैं
मैं चौंकते हुए बोली.... हैं?
फिर उसने जो बताना शुरू किया तो मन भर आया
बोली हम तीन भाई बहन थे मम्मी-पापा की लड़ाई और पापा के ड्रिंक करने से परेशान मम्मी ने स्यूसाइड कर लिया और कुछ दिनों में ज्यादा पीने से पापा की डेथ हो गई। हम तीनों एसओएस चिल्ड्रन होम में आ गए।
यहां 20 बच्चों के साथ एक मम्मी (जो कहीं से परेशान होकर आई हुई होती हैं या विडो होती हैं) होती हैं। हमारी बड़ी सारी फैमिली है। उसने एक बार मुझे अपने रहने वाली जगह भी दिखाई पर अचानक एक दिन ना जाने उसने आना बंद कर दिया।
मैंने उसके होम पर जाकर पूछताछ भी की पर वहां से उन्होंने कुछ जानकारी नहीं दी। फिर तब इतनी सुविधाएं भी नहीं होती थी इसलिए मैं उसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं जुटा पाई। नहीं जान पाई कि क्यों उसने कोर्स शुरू करने के कुछ दिन बाद ही छोड़ दिया और क्यों उसने कभी मुझसे कॉन्टेक्ट करने की कोशिश नहीं की। पर आज भी मुझे अपनी सहेली की बहुत ज्यादा याद आती है। जो कुछ दिनों में मेरी इतनी अच्छी दोस्त बन गई थी, जिसे मैं आज भी मिस करती हूं। सोचती हूं काश तब मोबाइल जैसी सुविधाएं होती तो मैं भी दोस्त से मिल पाती।
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