हम कितने ही बड़े बन जाये पर जड़ों में जो जुड़ाव है वह हमे दिल से अपनी जगह छोड़ने नहीं देता|हमारे संस्कार हर गलत बात पर मन को एक बार जरुर चेताते हैं ऐसा ही एक अनुभव| ये किस्सा जगह जगह से घूम कर ये पास आया तो मुझे लगा कि बुरे अनुभव शेयर करते हैं तो कुछ अच्छे भी करने चाहिए-
किस्सा छोटा-सा
ऑफिस से निकला तो मूड कुछ उखड़ा-उखड़ा सा था| मेरे ऑफिस से आगे चलकर वाइफ का भी ऑफिस था तो उसे पिक किया| गाड़ी मैं बैठते हुए बोली थोड़े फल लेने हैं|
कुछ ना बोलते हुए गाड़ी फल वालों की और मोड़ दी|
फल वाले से पूछा सेब क्या रेट दिए ?
इतने महंगे सेब दे रहे हो भैया कुछ कम करो|
भैया जी हम एकदम सही दे रहे हैं| यही भाव चल रहे हैं|
अब तुम बहस करोगे अरे हमे भी पता है क्या रेट चल रहा है
गाड़ी से उतरते देखा नहीं कि रेट बड़ा देते हो|फल वाले से थोड़ा तेजी से बोला|
फल वाले ने मायूस होते हुए कहा कोई नहीं भैया ले जाओ (थोड़ी सी निराशा और ठंडी आह गुस्से में देख ही नहीं पाया था मैं)|
विजेता की तरह मैं अपने रेट पर ही सेब लेकर चल दिया |
आगे जाते हुए फल वालों को सेब के रेट बोलते हुए सुना तो लगा की ठेले वाले से सच में कुछ ज्यादा ही कम रेट पर सेब ले लिए| अंदर से कुछ खटका और दिल ने कहा तुझे वो रेट इतने असर नहीं करेंगे जितने उसको कर जाएंगे| गलती तो कर बैठा था अब सुधारने का मन था, इसलिए गाड़ी को यू टर्न किया तो पास बैठी पत्नी ने पूछा अरे क्या हुआ? गाड़ी क्यों मोड़ ली?
मैं बोला कुछ नहीं बस इतना ही कहा की कुछ भूल गया|
ठेले वाले के पास जाकर रुका तो एक बारगी वो सहम गया| देखकर बोला क्या हुआ साहब कुछ गलती हो गई| मुंह ताकते हुए और भावों को पढ़ने की कोशिश करते हुए बोला क्या हुआ भैया?
मैं बोला लो भैया आपके बाकी बचे पैसे|
पर मैंने तो आपके हिसाब से रेट लगा दिया थे?
माफ़ी चाहता हूँ उस गुस्से के लिए पर आगे गया तो पता चला आपके ही रेट सबसे सही थे |
मुझे अहसास हुआ कहीं मेरी वजह से आपका नुकसान ना हो जाये इसलिए आ गया| एक बार और माफ़ी चाहता हूँ आपसे गुस्से में बात करने के लिए|
अरे भैया माफ़ी काहे की कभी-कभी हो जाता है| मुंह देखते हुए बोला भैया आपने इतना किया वही हमारे लिए बहुत है|अब उसकी आँखों में कुछ चमक थी |
ठेले से गाड़ी आगे बढ़ाई और म्युजिक ऑन किया| एक गहरी साँस ली जैसे तसल्ली सी आ गई थी पास बैठी पत्नी भी कनखियों से देख रही थी और होले होले मुस्कुरा रही थी| बीच बीच में गाने की पंक्तियाँ भी गुनगुनाने लगी थी ...
जिन्दगी एक सफर है सुहाना.....
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